उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gulab kanTon mein jis tarh muskuraate hain

गुलाब काँटों में जिस तरह मुस्कुराते हैं

گلاب کانٹوں میں جس طرح مسکراتے ہیں

शायर: Yaseen Ansari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुलाब काँटों में जिस तरह मुस्कुराते हैं
हम अपना दर्द ज़माने से यूँ छुपाते हैं

अमीर लोग बना लेते हैं मकान ऊँचे
ग़रीब लोगों से यूँ दूरियाँ बनाते हैं

न देख इन को हक़ारत से काम के हैं लोग
पसीना अपना ये मज़दूर जो बहाते हैं

वो लोग डरते नहीं हैं किसी भी आँधी से
मोहब्बतों के चराग़ों को जो जलाते हैं

जो बा-ज़मीर हैं ख़ुद्दार हैं तबी'अत से
नहीं बताते वो मजबूरियाँ छुपाते हैं

हमारे लफ़्ज़ हैं रौशन चराग़ों की मानिंद
हमारे लफ़्ज़ चमकते हैं जगमगाते हैं

हमारा काम बहुत अहमियत का है 'यासीन'
जो लोग सोए हुए हैं उन्हें जगाते हैं