उर्दू शायरी · ग़ज़ल

adawat ki bhasha kahan bolte hain

'अदावत की भाषा कहाँ बोलते हैं

عداوت کی بھاشا کہاں بولتے ہیں

शायर: Yaseen Ansari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अदावत की भाषा कहाँ बोलते हैं
मोहब्बत की हम तो ज़बाँ बोलते हैं

ग़रीबों की अब और हालत बुरी है
ग़रीबों के उजड़े मकाँ बोलते हैं

ये शोहरत की हो आग तुम को मुबारक
धुआँ है हम इस को धुआँ बोलते हैं

हैं बदली हुई दोस्तों की निगाहें
कहाँ हो के अब मेहरबाँ बोलते हैं

वो कानों में रस घोलते हैं हमारे
जो 'यासीन' उर्दू ज़बाँ बोलते हैं