उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karna jo mohabbat ka iqrar samajh lena

करना जो मोहब्बत का इक़रार समझ लेना

کرنا جو محبت کا اقرار سمجھ لینا

शायर: Hafeez Jaunpuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

करना जो मोहब्बत का इक़रार समझ लेना
इक बार नहीं उस को सौ बार समझ लेना

हम हों कि अदू उस में जो ज़ुल्म का शाकी हो
करता ही नहीं तुम को वो प्यार समझ लेना

मर जाए मगर जाना उस की न अयादत को
तुम जिस को मोहब्बत का बीमार समझ लेना

बन बन के बिगड़ता है वो काम मोहब्बत में
आसान नहीं जिस को दुश्वार समझ लेना

ग़फ़लत-कदा-ए-हस्ती जब कहते हैं आलम को
सौदा है फिर अपने को हुशियार समझ लेना

महफ़िल में रक़ीबों की जाना है अगर तुम को
सूरत से मुझे अपनी बेज़ार समझ लेना

दिल पर तो लगाते हो तुम तीर-ए-नज़र लेकिन
आहों को हमारी भी तलवार समझ लेना

छेड़ा जो मिरे आगे फिर तज़किरा-ए-दुश्मन
रक्खी हुई है मुझ से तकरार समझ लेना

पोशीदा 'हफ़ीज़' इस में असरार-ए-मोहब्बत हैं
आसान नहीं मेरे अशआ'र समझ लेना