उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karna hai to kisi dam taza tabiat kar jae

करना है तो किसी दम ताज़ा तबी'अत कर जाए

کرنا ہے تو کسی دم تازہ طبیعت کر جائے

शायर: Balwan Singh Azar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

करना है तो किसी दम ताज़ा तबी'अत कर जाए
कोई ख़ुशबू कहीं से आए सख़ावत कर जाए

वक़्त के हाथ को वो लम्हा मयस्सर ही नहीं
जो मिरे बिगड़े हुए दिल को नसीहत कर जाए

सिर्फ़ उम्मीद पे क़ाएम है यहाँ ये दुनिया
'ऐन मुमकिन है कि फिर कोई मोहब्बत कर जाए

मौत टल जाएगी कुछ देर ख़ुशी के मारे
मेरा बीमार अगर मेरी 'अयादत कर जाए

अब किसी ख़्वाब का क़ाइल नहीं हूँ मैं 'आज़र'
जो मिरी आँख में बैठा हो वो हिजरत कर जाए