उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaise samjhaunga un ko ki pari aaegi

कैसे समझाऊँगा उन को कि परी आएगी

کیسے سمجھاؤں گا ان کو کہ پری آئے گی

शायर: Danish Hayat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कैसे समझाऊँगा उन को कि परी आएगी
मेरी बातों पे जिन्हें सिर्फ़ हँसी आएगी

आँख मूँदे हुए ख़ल्वत में पड़ा सोचता हूँ
मेरी वहशत में कभी कोई कमी आएगी

उस ने सरगोशी में इक रंज दिया और कहा
आते आते ही तुझे नौहागरी आएगी

बस इसी बात से पहचान लिया जाएगा
मुस्कराउँगा तो आँखों में नमी आएगी

दो-जहाँ तश्त में रख कर उसे लौटा दूँगा
मेरे हिस्से में अगर तेरी कमी आएगी