उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahin to hota nahin hun zara barabar bhi

कहीं तो होता नहीं हूँ ज़रा बराबर भी

کہیں تو ہوتا نہیں ہوں ذرا برابر بھی (ردیف .. ن)

शायर: Danish Hayat3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहीं तो होता नहीं हूँ ज़रा बराबर भी
कहीं कहीं पे तो मैं बे-हिसाब होता हूँ

ख़राब हो तो रहा हूँ तुम्हारी चाहत में
ये देखना है कहाँ तक ख़राब होता हूँ

ब-वक़्त-ए-फज्र ज़रा देर को सँभलता है
ब-वक़्त-ए-‘अस्र मैं ख़ुद पर 'अज़ाब होता हूँ