उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaha ye kis ne ki wade ka etibar na tha

कहा ये किस ने कि वा'दे का ए'तिबार न था

کہا یہ کس نے کہ وعدے کا اعتبار نہ تھا

शायर: Hafeez Jaunpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहा ये किस ने कि वा'दे का ए'तिबार न था
वो और बात थी जिस से मुझे क़रार न था

शब-ए-विसाल वो किस नाज़ से ये कहते हैं
हमारे हिज्र में सच-मुच तुझे क़रार न था

बघारता है जो अब शैख़ ज़ोहद की बातें
तो क्या ये अहद-ए-जवानी में बादा-ख़्वार न था

फ़क़त थी एक ख़मोशी मिरे सुख़न का जवाब
नहीं नहीं तुझे कहना हज़ार बार न था

ये मुझ को देखते ही तू ने क्यूँ चुराई आँख
निगाह-ए-लुत्फ़ का क्या मैं उमीद-वार न था

वही थीं 'ऐश की रातें वही थे लुत्फ़ के दिन
किसी की याद किसी का जब इंतिज़ार न था

हज़ार शुक्र कि निकला वो सादिक़ुल-इक़रार
तुम्हें 'हफ़ीज़' की बातों का ए'तिबार न था