उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi Thahar ke suni hai bahaw ki aawaz

कभी ठहर के सुनी है बहाव की आवाज़

کبھی ٹھہر کے سنی ہے بہاؤ کی آواز

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी ठहर के सुनी है बहाव की आवाज़
सुबुक नदी में किसी सुस्त नाव की आवाज़

फ़ज़ा का शोर थमे तो दरों से आती है
घुटी घुटी सी बचाओ बचाओ की आवाज़

हमारे दरमियाँ बढ़ता सुकूत अस्ल में है
हमारे दरमियाँ बढ़ते तनाव की आवाज़

किसी को भेजते साँसों पे बोझ पड़ता है
जभी तो जाओ में दबती है वाओ की आवाज़

बड़ों में बहस है कमरे बढ़ा लें आँगन तक
मैं सुन रहा हूँ शजर के कटाव की आवाज़

तभी तो आग के नज़दीक बैठता नहीं मैं
मुझे अलाव से आती है आओ की आवाज़

ये इज़्तिराब उतरता है वज़्न में मुझ पर
ये शा'इरी है दिमाग़ी खिंचाव की आवाज़