उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi halka kabhi gahra hamari aankh ka kajal

कभी हल्का कभी गहरा हमारी आँख का काजल

کبھی ہلکا کبھی گہرا ہماری آنکھ کا کاجل

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी हल्का कभी गहरा हमारी आँख का काजल
हमारे ग़म से वाबस्ता हमारी आँख का काजल

हमारे सुर्ख़ होंटों के तले है इक तिलिस्मी तिल
फिर उस पर काले जादू सा हमारी आँख का काजल

ग़ज़ल में बात होती है ग़ज़ाल-आँखों के सुरमे की
कोई फिर क्यों नहीं लिखता हमारी आँख का काजल

बताओ कब तलक रस्ता तके पलकों की चौखट पर
तुम्हारी दीद का प्यासा हमारी आँख का काजल

तुम्हारे बा'द हर मंज़र नज़र से दूर रखना था
कशाकश में बहुत बिखरा हमारी आँख का काजल

हमें तो था यक़ीं तुम दुख समझ लोगे इन आँखों का
मगर तुम ने फ़क़त देखा हमारी आँख का काजल

मोहब्बत हिज्र ख़ल्वत दर्द लाचारी तड़प आँसू
है शाहिद सब का इकलौता हमारी आँख का काजल