उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kab nuqsan uThaya humne

कब नुक़्सान उठाया हम ने

کب نقصان اٹھایا ہم نے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कब नुक़्सान उठाया हम ने
'इश्क़ में आप कमाया हम ने

सुनने वाले 'उजलत में थे
क़िस्से को निपटाया हम ने

धूप की अबजद रटते-रटते
बाँच लिया इक साया हम ने

ख़्वाब नहीं हैं ये काँटे हैं
आँखों को समझाया हम ने

हम बाशिंदे हम ही बानी
तन्हा शह्र बसाया हम ने

वहशत के काले जादू से
सुब्ह को शाम बनाया हम ने

भूला-बिसरा आबी नग़्मा
सहरा-सहरा गाया हम ने