उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kash itna tu mere pas kabhi aa jae

काश इतना तू मिरे पास कभी आ जाए

کاش اتنا تو مرے پاس کبھی آ جائے

शायर: Paraveen Rai7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काश इतना तू मिरे पास कभी आ जाए
बीच से हो के हवा जाए तो शर्मा जाए

ये तिरी याद का आना भी है कुछ ऐसा ही
जैसे मेहमान अचानक से कोई आ जाए

इस लिए भी मैं तुझे याद किया करता हूँ
क्या पता कल को ये एग्ज़ाम में पूछा जाए

काश ऐसा हो कि ऐ यार किसी दिन मुझ से
राह चलते हुए इक बार तू टकरा जाए

एक मैं हूँ जो तुझे देख के पगला जाऊँ
एक तू है जो मुझे देख के शर्मा जाए

यूँ लगेगा के कोई चाँद छुपा हो जैसे
ये तिरी ज़ुल्फ़ जो चेहरे पे तिरे आ जाए

मैं यही सोच के छूने से तुझे डरता हूँ
ये तिरी आग मिरा जिस्म न झुलसा जाए