उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaghazi thin jala ke rakh di hain

काग़ज़ी थीं जला के रख दी हैं

کاغذی تھیں جلا کے رکھ دی ہیں

शायर: Umar Farhat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काग़ज़ी थीं जला के रख दी हैं
सारी चिड़ियाँ उड़ा के रख दी हैं

तुझ को अब दिल से देखना है मुझे
अपनी आँखें छुपा के रख दी हैं

आज देखा है बे-हिजाब उस को
सारी बातें भुला के रख दी हैं

देखना इन में ख़्वाब आएँगे
मैं ने आँखें सुला के रख दी हैं

सब्र मेरा शिआ'र ठहरा है
ख़्वाहिशें सब दबा के रख दी हैं