उर्दू शायरी · ग़ज़ल

junun mein kar diya tha kab kuchh nahin pata tha

जुनून में कर दिया था कब कुछ नहीं पता था

جنون میں کر دیا تھا کب کچھ نہیں پتہ تھا

शायर: Umair Najmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुनून में कर दिया था कब कुछ नहीं पता था
मैं 'इश्क़ में मुब्तला था तब कुछ नहीं पता था

ये ढूँढते हो जो अब जुनूँ से फ़रार की राह
तुम इस तरफ़ आए क्यों थे जब कुछ नहीं पता था

समझ नहीं आ रही थी रोऊँ फिरूँ कि सोऊँ
थी हिज्र की पहली पहली शब कुछ नहीं पता था

मुझे बस इतना पता था अफ़्सुर्दगी बहुत है
नतीजा दौरानिया सबब कुछ नहीं पता था

मैं चूमता था वो हाथ दीवाना-वार 'नजमी'
वो ख़ब्त था 'इश्क़ या अदब कुछ नहीं पता था