उर्दू शायरी · ग़ज़ल

junun ke shauq mein yun mahw-e-ashiqi na rahe

जुनूँ के शौक़ में यूँ मह्व-ए-आशिक़ी न रहे

جنوں کے شوق میں یوں محو عاشقی نہ رہے

शायर: Aarib Hashmi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुनूँ के शौक़ में यूँ मह्व-ए-आशिक़ी न रहे
कि मेरे बस में ये मेरी ही ज़िंदगी न रहे

लहू भी अपनी रगों का चराग़ में डालो
हवा जहाँ भी चलेगी यूँ सर-फिरी न रहे

कमाल फ़न में न इतना भी दे मिरे मालिक
कि मेरे इश्क़ के लहजे में आजिज़ी न रहे

ये सोच कर ही तो मैं जल्द लौट आया हूँ
तू इंतिज़ार करे और जागती न रहे