उर्दू शायरी · ग़ज़ल

juda hone ka usko bhi bahut sadma hua hoga

जुदा होने का उस को भी बहुत सदमा हुआ होगा

جدا ہونے کا اس کو بھی بہت صدمہ ہوا ہوگا

शायर: Raees Manzar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुदा होने का उस को भी बहुत सदमा हुआ होगा
वो पहली बार इस अंदाज़ से तन्हा हुआ होगा

सुना होगा जब उस ने इत्तिफ़ाक़न तज़्किरा मेरा
यक़ीनन एक लम्हे को वो संजीदा हुआ होगा

चलो देखें निकल कर आज फिर यादों की दुनिया में
कम-अज़-कम एक वो चेहरा तो पहचाना हुआ होगा

जहाँ हर आदमी सिमटा हुआ था ज़ात में अपनी
किसे अपने अधूरे-पन का अंदाज़ा हुआ होगा

उसे इक इत्तिफ़ाक़ी अम्र कहना भी है नादानी
हुआ है जो बहुत सोचा बहुत समझा हुआ होगा

जो मेरी ख़ामुशी अर्बाब-ए-महफ़िल को खली होगी
तो मेरे लब-कुशा होने पे हंगामा हुआ होगा

सफ़र लम्बा है जब तक लौट कर आओगे तुम 'मंज़र'
तुम्हारे शहर का नक़्शा बहुत बदला हुआ होगा