उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo sun sako to suno tum fughan charaghon ki

जो सुन सको तो सुनो तुम फ़ुग़ाँ चराग़ों की

جو سن سکو تو سنو تم فغاں چراغوں کی

शायर: Nadeem Najid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो सुन सको तो सुनो तुम फ़ुग़ाँ चराग़ों की
लवें चुरा ली गई हैं यहाँ चराग़ों की

मैं ख़ाल-ओ-ख़द के बिखरने से बचना चाहता हूँ
सो मुझ को चाहिए कुछ दिन अमाँ चराग़ों की

जिसे भी चाहिए वो आए रौशनी ले जाए
सजाए बैठे हैं हम तो दुकाँ चराग़ों की

यहीं कहीं पे मोहब्बत का है पड़ाव मियाँ
सुनाई देने लगी है अज़ाँ चराग़ों की

सहर से कहिये कि ठहरे और इंतिज़ार करे
मैं सुन रहा हूँ अभी दास्ताँ चराग़ों की