उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo shaKHs yahan ishq mein nakaam hua hai

जो शख़्स यहाँ 'इश्क़ में नाकाम हुआ है

جو شخص یہاں عشق میں ناکام ہوا ہے

शायर: Faisal Shahzad10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो शख़्स यहाँ 'इश्क़ में नाकाम हुआ है
फिर उस का ज़माने में बड़ा नाम हुआ है

तुम ख़ुश हो कि इल्ज़ाम किसी और पे ठहरा
इक शख़्स तिरे नाम से बद-नाम हुआ है

आग़ाज़-ए-मोहब्बत की कोई बात न पूछो
अंजाम जो होना था वो अंजाम हुआ है

रह-गीर भी अब उस की गवाही नहीं देंगे
वो क़त्ल जो रस्ते में सर-ए-'आम हुआ है

हम 'इश्क़ छुपाते थे मगर छुप नहीं पाया
जो काम न होना था वही काम हुआ है

कुछ दिन से तिरी याद भी आई नहीं मुझ को
दिल फिर भी उदास अपना सर-ए-शाम हुआ है

तुझ पर किसी मंतर का असर कोई न होगा
तुझ सा बुत-ए-काफ़िर भी कभी राम हुआ है

लब खोलना ठहरा है यहाँ लाइक़-ए-ता'ज़ीर
हर लफ़्ज़ यहाँ बा’इस-ए-इल्ज़ाम हुआ है

हम होंगे शिफ़ायाब तिरी नज़र-ए-करम से
मरहम से कहाँ ज़ख़्म को आराम हुआ है

ये ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर कोई जाल है 'फ़ैसल'
हर ताइर-ए-आज़ाद तह-ए-दाम हुआ है