उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo kuchh tha muqaddar mein gawara to nahin tha

जो कुछ था मुक़द्दर में गवारा तो नहीं था

جو کچھ تھا مقدر میں گوارا تو نہیں تھا

शायर: Kaifi Chirayyakoti6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो कुछ था मुक़द्दर में गवारा तो नहीं था
दर-पर्दा कहीं उन का इशारा तो नहीं था

जितनी थी खटक साँस की कुल नग़्मा-ए-जाँ थी
क्या तुम ने मुझे हँस के पुकारा तो नहीं था

ता-ज़ीस्त मुझे जान-ए-हज़ीं बख़्शने वाले
इस में कोई अंदाज़ तुम्हारा तो नहीं था

रो रो के क़यामत का लिया नाम किसी ने
कोई तिरी उम्मीद का मारा तो नहीं था

टूटे हुए क्यों दिल को मिरे देख रहे हो
आँसू था मिरी सुब्ह का तारा तो नहीं था

मुद्दत से बड़ा नाम है फ़िरदौस का 'कैफ़ी'
गेसू को कहीं उस ने सँवारा तो नहीं था