उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis qadar hain husn ki zebaiyan

जिस क़दर हैं हुस्न की ज़ेबाइयाँ

جس قدر ہیں حسن کی زیبائیاں

शायर: Kaifi Chirayyakoti6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस क़दर हैं हुस्न की ज़ेबाइयाँ
उस क़दर हैं इश्क़ की रुस्वाइयाँ

मेरी जानिब है रुख़-ए-तस्वीर-ए-दोस्त
लूट लीं इस ने मिरी तन्हाइयाँ

देने वाले अब तो दामन भी नहीं
इस क़दर तेरी करम-फ़रमाइयाँ

हुस्न का नाज़-ए-पशेमाँ देख कर
इश्क़ को आने लगीं अंगड़ाइयाँ

हो गया मुश्किल तिरा पहचानना
रोज़-अफ़्ज़ूँ हैं तिरी रानाइयाँ

ग़म की शब 'कैफ़ी' मिरा कोई नहीं
दूर मुझ से हो गईं परछाइयाँ