उर्दू शायरी · ग़ज़ल

husn-e-hijab-ashna jaanib-e-baam aa gaya

हुस्न-ए-हिजाब-आश्ना जानिब-ए-बाम आ गया

حسن حجاب آشنا جانب بام آ گیا

शायर: Kaifi Chirayyakoti8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुस्न-ए-हिजाब-आश्ना जानिब-ए-बाम आ गया
बादा-ए-तह-नशीन-ए-जाम ता लब-ए-जाम आ गया

आप ने फेंक दी नक़ाब गर्मी-ए-इश्क़ देख कर
हश्र-नवाज़ हुस्न आज हश्र के काम आ गया

मिल्लत-ए-कुफ़्र-ओ-दीं की बहस गर्म थी ख़ानक़ाह में
इतने में कोई मय पिए दस्त-ब-जाम आ गया

शौक़ का ए'तिबार क्या यास ये इख़्तियार क्या
राह-ए-उम्मीद-ओ-बीम में दिल का मक़ाम आ गया

दिल मिरा देखता रहा और मेरी ज़बान पर
लज़्ज़त-ए-जान-ए-आरज़ू आप का नाम आ गया

दहर जवान हो गया खुल गया मय-कदे का दर
साक़ी-ए-मस्त मस्त-ए-नाज़ मस्त-ए-ख़िराम आ गया

जल्वा-ए-बे-हिजाब को ख़ूब समझ रहा हूँ मैं
महशर-ए-दीद मुंतज़िर मंज़र-ए-आम आ गया

'कैफ़ी'-ए-बे-क़रार सुन ये रग-ए-जाँ के साज़ से
है मिरी इल्तिजा क़ुबूल दिल का पयाम आ गया