उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-tab pas shama ke parwana aa gaya

बे-ताब पास शम्अ' के परवाना आ गया

بے تاب پاس شمع کے پروانہ آ گیا

शायर: Kaifi Chirayyakoti6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-ताब पास शम्अ' के परवाना आ गया
क्या बात है कि होश में दीवाना आ गया

साक़ी की बारगाह में तौबा हुई क़ुबूल
ख़ुद ढूँढता हुआ मुझे मय-ख़ाना आ गया

सज्दों का मेरे नाज़ उठाने के वास्ते
का'बे के सामने दर-ए-जानाना आ गया

दामन को मेरे देख के हसरत के हाथ में
याद उन को अपना लुत्फ़-ए-करीमाना आ गया

मुझ को मिरे सवाल पे बख़्शा है दो-जहाँ
अब ए'तिबार-ए-तर्ज़-ए-फ़क़ीराना आ गया

थी शैख़-ओ-बरहमन की मय-ओ-अंगबीं पे बहस
इतने में बढ़ के 'कैफ़ी’-ए-दीवाना आ गया