उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo junun-ashna nahin hota

जो जुनूँ-आश्ना नहीं होता

جو جنوں آشنا نہیں ہوتا

शायर: Sabir Abuhari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो जुनूँ-आश्ना नहीं होता
आदमी काम का नहीं होता

बात करता है नाख़ुदा ऐसे
जैसे कोई ख़ुदा नहीं होता

उन से अक्सर मिली ख़बर तेरी
जिन को अपना पता नहीं होता

जिस्म-ए-फ़ानी तो इक लबादा है
मरने वाला फ़ना नहीं होता

दार तक तो जुनूँ ही जाता है
अक़्ल में हौसला नहीं होता

लाख मजबूर है बशर फिर भी
ये जो चाहे तो क्या नहीं होता

दिल से जब तक अदा न हो 'साबिर'
कोई सज्दा रवा नहीं होता