उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo chahte ho so kahte ho chup rahne ki lazzat kya jaano

जो चाहते हो सो कहते हो चुप रहने की लज़्ज़त क्या जानो

جو چاہتے ہو سو کہتے ہو چپ رہنے کی لذت کیا جانو

शायर: Aal-e-Raza Raza4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो चाहते हो सो कहते हो चुप रहने की लज़्ज़त क्या जानो
ये राज़-ए-मोहब्बत है प्यारे तुम राज़-ए-मोहब्बत क्या जानो

अल्फ़ाज़ कहाँ से लाऊँ छाले की टपक को समझाऊँ
इज़हार-ए-मोहब्बत करते हो एहसास-ए-मोहब्बत क्या जानो

क्या हुस्न की भीक भी होती है जब चुटकी चुटकी जुड़ती है
हम अहल-ए-ग़रज़ जानें इस को तुम साहब-ए-दौलत क्या जानो

है फ़र्क़ बड़ा ऐ जान-ए-'रज़ा' दिल देने में दिल लेने में
उल्फ़त का तअल्लुक़ जान के भी रिश्ते की नज़ाकत क्या जानो