उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jism siyahi banaunga

जिस्म सियाही बनाऊँगा

جسم سیاہی بناؤں گا

शायर: Umar Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस्म सियाही बनाऊँगा
तेरा हर्फ़ सजाऊँगा

तू बहता पानी बन जा
मैं मछली बन जाऊँगा

कल मौसम की हथेली पर
नाम तिरा खुदवाऊँगा

अपना ग़ुबार उड़ा कर मैं
कुछ तस्वीर बनाऊँगा

किसी किवाड़ की आड़ में अब
तुझ को ला के छुपाऊँगा

तिरे बदन के पानी से
मैं सूरज चमकाऊँगा