उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jin ka uncha maqam hota hai

जिन का ऊँचा मक़ाम होता है

جن کا اونچا مقام ہوتا ہے

शायर: Ghaibi Jaunpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिन का ऊँचा मक़ाम होता है
उन का दुनिया में नाम होता है

हम ने देखा है मय-कदे के सिवा
हर जगह ख़ास-ओ-'आम होता है

ख़ून बहता है बे-गुनाहों का
जब कहीं क़त्ल-ए-'आम होता है

उस को ख़ुशियाँ कभी नहीं मिलतीं
जो हवस का ग़ुलाम होता है

दूरियाँ क़ुर्बतों में ढलती हैं
जब सलाम-ओ-पयाम होता है

कोई ज़र्रा कभी कहाँ 'ग़ैबी'
क़ाबिल-ए-एहतिराम होता है