उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaman walo chaman ki dastan kuchh aur kahti hai

चमन वालो चमन की दास्ताँ कुछ और कहती है

چمن والو چمن کی داستاں کچھ اور کہتی ہے

शायर: Ghaibi Jaunpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमन वालो चमन की दास्ताँ कुछ और कहती है
जो सच पूछो निगाह-ए-बाग़बाँ कुछ और कहती है

ये माना फ़स्ल-ए-गुल है औज पर रंग-ए-बहाराँ है
मगर मुझ से फ़ज़ा-ए-गुलसिताँ कुछ और कहती है

नहीं मा'लूम क्या अंजाम हो या-रब गुलिस्ताँ का
मनाज़िर देख कर दिल की ज़बाँ कुछ और कहती है

शिफ़ा हो जाए मुमकिन है मरीज़-ए-'इश्क़ को यारो
मगर हालत नसीब-ए-दुश्मनाँ कुछ और कहती है

वो कहते हैं करेंगे दर्द का दरमाँ मगर 'ग़ैबी'
ब-अंदाज़-ए-दिगर उन की ज़बाँ कुछ और कहती है