उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is tarah se bazm mein li usne angDai ki bas

इस तरह से बज़्म में ली उस ने अंगड़ाई कि बस

اس طرح سے بزم میں لی اس نے انگڑائی کہ بس

शायर: Ghaibi Jaunpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस तरह से बज़्म में ली उस ने अंगड़ाई कि बस
हो गए शैख़-ए-हरम भी ऐसे शैदाई कि बस

मय-कदे पर इस तरह काली घटा छाई कि बस
तोड़ दी तौबा तबी'अत ऐसी ललचाई कि बस

दिल पे रक्खे हाथ हम पहरों उसे देखा किए
बानू-ए-शब यूँ सितारों से थी गहनाई की बस

हर तरफ़ मजबूरियाँ दुश्वारियाँ महरूमियाँ
ज़िंदगी कुछ ऐसे नाज़ुक मोड़ पे लाई कि बस

रेज़ा-रेज़ा हो गया पल भर में हस्ती का वुजूद
चोट ऐसी हम ने राह-ए-'इश्क़ में खाई कि बस

एक नागिन की तरह लम्हा-ब-लम्हा दोस्तो
मुझ को ऐसी डस रही थी शाम-ए-तन्हाई कि बस

शश्दर-ओ-हैरान हैं सुन कर ग़ज़ल अहल-ए-सुख़न
फ़िक्र में 'ग़ैबी' तिरी है ऐसी गहराई की बस