उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chain se baiThne deti hi nahin ek nafas

चैन से बैठने देती ही नहीं एक नफ़स

چین سے بیٹھنے دیتی ہی نہیں ایک نفس

शायर: Ghaibi Jaunpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चैन से बैठने देती ही नहीं एक नफ़स
कहीं आवाज़-ए-अज़ान और कहीं शोर-ए-जरस

ख़ून इंसानों का पीने पे तुले बैठे हैं
कहीं मस्जिद के मनारे कहीं मंदिर के कलस

दिल में इक बुग़्ज़ की जो गाँठ लगा रक्खी है
तो इसे खोल न भाई तू इसे और न कस

थाह इस की न मिली है न मिलेगी ता-हश्र
हाँ समुंदर से भी गहरा है बहुत बहर-ए-हवस

अब तो 'ग़ैबी' यही गुलशन से सदा आती है
फूल तो फूल हैं काँटों को तरस अब के बरस