उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab usko chhoD kar bahar gaya tha

जब उस को छोड़ कर बाहर गया था

جب اس کو چھوڑ کر باہر گیا تھا

शायर: Umair Najmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब उस को छोड़ कर बाहर गया था
मुझे जिस-जिस ने देखा डर गया था

निहत्था था मैं तलवारों के आगे
अगर बाज़ू बचाता सर गया था

मुक़द्दर था ख़ला जैसा तजर्रुद
मैं जिस रफ़्तार से ऊपर गया था

तू कोशिश कर कि आँखें ख़ाली हो जाएँ
हमारा ज़ख़्म ऐसे भर गया था

दिखाए ज़िंदगी भर साथ के ख़्वाब
फिर इक शब नींद में वो मर गया था

लगा ना दश्त से आया हूँ 'नजमी'
मैं हलफ़न कह रहा हूँ घर गया था