उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raushni jab bhi lab hilati hai

रौशनी जब भी लब हिलाती है

روشنی جب بھی لب ہلاتی ہے

शायर: Balwan Singh Azar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रौशनी जब भी लब हिलाती है
रात चुप चाप बैठ जाती है

कोई आवारगी से कह दे अब
एक चौखट मुझे बुलाती है

घुप-अँधेरे का फ़ाएदा ले कर
ओस फूलों पे बैठ जाती है

कल तलक तो वरक़ ही उड़ते थे
अब हवा हर्फ़ भी उड़ाती है

जागते हैं सभी शजर 'आज़र'
दश्त में किस को नींद आती है