उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jari thi kab se kun ki sada rok di gai

जारी थी कब से कुन की सदा रोक दी गई

جاری تھی کب سے کن کی صدا روک دی گئی

शायर: Umair Najmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जारी थी कब से कुन की सदा रोक दी गई
लेखक का दिल भरा तो कथा रोक दी गई

हर शब हवा से बजती थीं सब बंद खिड़कियाँ
इक शब वो खोल दीं तो हवा रोक दी गई

जाने हैं कितनी चौकियाँ 'अर्श-ए-बरीं तलक
जाने कहाँ हमारी दु'आ रोक दी गई

मैं ला-'इलाज हो गया हूँ यूँ पता चला
इक दिन बिना बताए दवा रोक दी गई

गिर्ये को तर्क कर के मैं ख़ुश-बाश हो गया
ग़म मर गया जब उस की ग़िज़ा रोक दी गई

मेरी सज़ा-ए-मौत पे सब ग़म-ज़दा थे और
मैं ख़ुश कि ज़िंदगी की सज़ा रोक दी गई