उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaane kitna kidhar gaya hun main

जाने कितना किधर गया हूँ मैं

جانے کتنا کدھر گیا ہوں میں

शायर: Balwan Singh Azar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाने कितना किधर गया हूँ मैं
चार जानिब बिखर गया हूँ में

'अक्स भी अब नज़र नहीं आता
आइने में भी मर गया हूँ मैं

झुर्रियाँ पड़ गई हैं चेहरे पर
कुछ ज़ियादा सँवर गया हूँ मैं

वो समुंदर सिसकता रहता है
जब से कूज़े में भर गया हूँ मैं

रौशनी ख़ुद घना अंधेरा है
रौशनी से गुज़र गया हूँ मैं

मेरी आवारगी के चर्चे हैं
अब के शायद सुधर गया हूँ मैं