उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is KHarabe mein kuchh aage wo jagah aati hai

इस ख़राबे में कुछ आगे वो जगह आती है

اس خرابے میں کچھ آگے وہ جگہ آتی ہے

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस ख़राबे में कुछ आगे वो जगह आती है
कि जहाँ ख़्वाब भी टूटे तो सदा आती है

मैं ने ज़िंदान में सीखा था असीरों से इक इस्म
जिस को दीवार पे फूंकें तो हवा आती है

ख़ूब रौनक़ थी इन आँखों में फिर इक ख़्वाब आया
ऐसे जैसे किसी बस्ती में वबा आती है

उस को पर्दे का तरद्दुद नहीं करना पड़ता
ऐसा चेहरा है कि देखें तो हया आती है

लड़ने जाते हैं कि कुछ माल-ए-ग़नीमत ले आएँ
और फिर घर की तरफ़ सुर्ख़ ज़िरह आती है

ठीक है साथ रहो मेरे मगर एक सवाल
तुम को वहशत से हिफ़ाज़त की दु'आ आती है

सहन में फिरती है बरसों की सधाई हुई याद
जब भी पुच्कार के कहता हूँ कि आ आती है