उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek din zaban sukut ki puri banaunga

इक दिन ज़बाँ सुकूत की पूरी बनाऊँगा

اک دن زباں سکوت کی پوری بناؤں گا

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक दिन ज़बाँ सुकूत की पूरी बनाऊँगा
मैं गुफ़्तुगू को ग़ैर-ज़रूरी बनाऊँगा

तस्वीर में बनाऊँगा दोनों के हाथ और
दोनों में एक हाथ की दूरी बनाऊँगा

मुद्दत समेत जुमला ज़वाबित हों तय-शुदा
या'नी तअ'ल्लुक़ात उबूरी बनाऊँगा

तुझ को ख़बर न होगी कि मैं आस-पास हूँ
इस बार हाज़िरी को हुज़ूरी बनाऊँगा

रंगों पे इख़्तियार अगर मिल सका कभी
तेरी सियाह पुतलियाँ भूरी बनाऊँगा

जारी है अपनी ज़ात पे तहक़ीक़ आज-कल
मैं भी ख़ला पे एक थ्योरी बनाऊँगा

मैं चाह कर वो शक्ल मुकम्मल न कर सका
उस को भी लग रहा था अधूरी बनाऊँगा