उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hosh mein aata hai insan Thokaren khane ke baad

होश में आता है इंसाँ ठोकरें खाने के बा'द

ہوش میں آتا ہے انساں ٹھوکریں کھانے کے بعد

शायर: D. Raj Kanwal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

होश में आता है इंसाँ ठोकरें खाने के बा'द
दिन निकलता है अँधेरी रात ढल जाने के बा'द

हर कोई दुनिया में अपने को समझता है ख़ुदा
एक दीवाना पड़ा है एक दीवाने के बा'द

आप आँखों से पिलाएँ और फिर देखें ज़रा
एक पैमाना भरेगा एक पैमाने के बा'द

कौन कहता है नहीं है 'इश्क़ मेरा कामयाब
ज़िक्र करते हैं वो मेरा अपने अफ़्साने के बा'द

एक पर्दा भी रहेगा दिल-लगी की दिल-लगी
एक मस्जिद भी बनाओ एक मयख़ाने के बा'द

बे-तुकी करता है बातें जब तलक पीता नहीं
होश में आता है वा'इज़ जाम छलकाने के बा'द

क्या करे कोई भरोसा रहनुमाओं पर 'कँवल'
ख़ुद बहक जाते हैं अक्सर हम को समझाने के बा'द