उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hasin sarapa jamal aankhen

हसीं सरापा जमाल आँखें

حسیں سراپا جمال آنکھیں

शायर: Saadi Gilani8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हसीं सरापा जमाल आँखें
निशान-ए-बद्र-ओ-हिलाल आँखें

दिलों का सब्र-ओ-क़रार लूटें
हिलाल अबरू ग़ज़ाल आँखें

वो शोख़ मख़मूर और चंचल
वो सादगी की मिसाल आँखें

ये सोए फ़ित्ने जगा रही हैं
ज़रा तू अपनी सँभाल आँखें

नहीं दो-'आलम में मिस्ल जिन की
वो दो 'अदीम-उल-मिसाल आँखें

जवाब जिस का न था न होगा
कुछ ऐसा दिलकश सवाल आँखें

क़रीब से भी क़रीब-तर हैं
हों जैसे कोई ख़याल आँखें

लिखे भी 'सा'दी' तो क्या लिखे अब
हैं जब मुजस्सम कमाल आँखें