उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil hai unki tajalliyat mein gum

दिल है उन की तजल्लियात में गुम

دل ہے ان کی تجلیات میں گم

शायर: Saadi Gilani8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल है उन की तजल्लियात में गुम
हुस्न-ए-यज़्दाँ की काएनात में गुम

दोनों 'आलम हैं हैरती जिस के
वो हक़ीक़त है तेरी ज़ात में गुम

मिल ही जाएँगे एक दूजे को
दोनों हैं एक काएनात में गुम

ज़ुल्फ़ बिखरी है रू-ए-ताबाँ पर
रात दिन में तो दिन है रात में गुम

उन का आना था बस सर-ए-बालीं
मौत होने लगी हयात में गुम

शैख़ साहब के क्या रुकू'ओ-सुजूद
वो तो हैं वर्ता-ए-नजात में गुम

कैसे मुमकिन भला जुदाई हो
मैं हूँ उस में वो मेरी ज़ात में गुम

छोड़ कर इक जहान-ए-ने'मत को
'सा'दी' उन की नवाज़िशात में गुम