उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hath mein taswir le kar us sitam-ijad ki

हाथ में तस्वीर ले कर उस सितम-ईजाद की

ہاتھ میں تصویر لے کر اس ستم ایجاد کی

शायर: Saadi Gilani9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाथ में तस्वीर ले कर उस सितम-ईजाद की
दिल में इक मश'अल जलाई हम ने उस की याद की

जैसे जैसे देखता हूँ उस बुत-ए-नौ-ख़ेज़ को
हसरतें बढ़ती ही जाती हैं दिल-ए-नाशाद की

इक नज़र तेरी ने लूटा ज़ीस्त का सामाँ मिरा
इक तबस्सुम ने तिरे दुनिया-ए-दिल बर्बाद की

इक न समझी इक न मानी इक नज़र सानी न की
लाख पीटा दिल-जिगर फ़रियाद पर फ़रियाद की

कर दिया पामाल पा-ए-नाज़ से मदफ़न मिरा
इक हसीं ने इस तरह मिट्टी मिरी बर्बाद की

मेरे नाले सुन के 'अर्श-ओ-फ़र्श भी हिलने लगे
काँप उठी दुनिया जो मैं ने हिज्र में फ़रियाद की

दास्तान-ए-ग़म मिरी सुन कर वो फ़रमाने लगे
झूट सी लगती हैं ये बातें तिरी रूदाद की

हम अगर क़ैद-ए-क़फ़स में हैं तो इस का ग़म नहीं
हम पे जो गुज़रे सो गुज़रे ख़ैर हो सय्याद की

जाते जाते इस तरफ़ से भी गुज़रते जाइए
रहगुज़र से दूर कुछ तुर्बत नहीं 'हम्माद' की