उर्दू शायरी · ग़ज़ल

darmiyan ab muraslat kahan

दरमियाँ अब मुरासलात कहाँ

درمیاں اب مراسلات کہاں

शायर: Saadi Gilani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दरमियाँ अब मुरासलात कहाँ
वो मरासिम मु'आमलात कहाँ

बख़्त में वो तजल्लियात कहाँ
अब वो पहले सी काएनात कहाँ

मेहरबाँ हम पे अब हयात कहाँ
दिन कहाँ दिन है रात रात कहाँ

फिर क़ज़ा लाई उन के कूचे में
दाम-ए-तक़दीर से नजात कहाँ

हम को पल पल की है ख़बर सारी
आप होते हैं रात रात कहाँ

अब निगाह-ए-करम हुई लेकिन
अब वो पहले सी ख़्वाहिशात कहाँ

'सा'दी' सुनते नहीं किसी की वो
और फिर तेरी बात बात कहाँ