उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hashr-saman junun-e-shahr mein hun

हश्र-सामाँ जुनून-ए-शहर में हूँ

حشر ساماں جنون شہر میں ہوں

शायर: Umar Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हश्र-सामाँ जुनून-ए-शहर में हूँ
मैं किसी की निगाह-ए-क़हर में हूँ

आसमाँ से सहीफ़े उतरे हैं
रात के इक क़दीम पहर में हूँ

दुनिया वालो उस इक नज़र के तुफ़ैल
जैसा भी हूँ मैं आज दहर में हूँ

है हिफ़ाज़त से मुझ को रक्खे हुए
रात-दिन मैं तो 'अक्स-ए-मेहर में हूँ

मेरा उस का मुक़ाबला कैसा
वो समंदर में है मैं नहर में हूँ

ज़िंदगी काटनी है यूँही 'उमर'
गाँव में रह के तेरे शहर में हूँ