उर्दू शायरी · ग़ज़ल

harf aur saut ki jagir pe aae hue hain

हर्फ़ और सौत की जागीर पे आए हुए हैं

حرف اور صوت کی جاگیر پہ آئے ہوئے ہیں

शायर: Nadeem Najid4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर्फ़ और सौत की जागीर पे आए हुए हैं
मेरा मतलब है दर-ए-'मीर' पे आए हुए हैं

जिस क़दर घाव लगे हैं तन-ए-ख़स्ता पे मिरे
उतने इल्ज़ाम भी शमशीर पे आए हुए हैं

इक 'अजब क़ैद से गुज़रे हैं कि ज़ख़्मों के निशाँ
जिस्म तो जिस्म है ज़ंजीर पे आए हुए हैं

कैसे करता न भला उस की मोहब्बत का यक़ीं
नक़्श उस के मिरी तस्वीर पे आए हुए हैं