उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har nukta-e-butan hai ada saz-e-dil-fareb

हर नुक्ता-ए-बुताँ है अदा साज़-ए-दिल-फ़रेब

ہر نکتۂ بتاں ہے ادا ساز دل فریب

शायर: Lutfunnisa Imtiyaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर नुक्ता-ए-बुताँ है अदा साज़-ए-दिल-फ़रेब
ख़ाली नहीं तरब से ये है नाज़-ए-दिल-फ़रेब

ऐसे ठटोलियों से न कर बे-क़रार दिल
जीने दे कोई दम तू ऐ तन्नाज़-ए-दिल-फ़रेब

शुक्र-ए-ख़ुदा फिरा है मिरा नामा-बर शिताब
आ कान में कहे है कई राज़-ए-दिल-फ़रेब

है ख़ौफ़-ए-शादी मर्ग न हूँ इस ख़ुशी से मैं
उस की ज़बानी सुनते ये आवाज़-ए-दिल-फ़रेब

देखा ही क्या बला है जो बे-ख़ुद है 'इम्तियाज़'
किस की निगाह-ए-मस्त का अंदाज़-ए-दिल-फ़रेब

ख़ाना-ख़राब मुझ से छुपावे है क्यूँ बता
देखूँ वो कौन है तिरा दम-साज़ दिल-फ़रेब

भर आह रो कहा कि वो मस्त-ए-शबाब है
मिलता नहीं किसी से ये ए'ज़ाज़-ए-दिल-फ़रेब