उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek hon nalan qafas mein hae ai bulbul KHamosh

एक हों नालाँ क़फ़स में हाए ऐ बुलबुल ख़मोश

ایک ہوں نالاں قفس میں ہائے اے بلبل خموش

शायर: Lutfunnisa Imtiyaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक हों नालाँ क़फ़स में हाए ऐ बुलबुल ख़मोश
सुन तिरा आवाज़ और सहरा हुआ है सब्ज़-पोश

दे पियाला अब तू साक़ी कुछ नहीं धड़का रहा
वाइज़ा कह मोहतसिब से हम हुए हैं जाम-नोश

है यही दहशत मबादा ये जो भावे ख़ल्क़ कूँ
बे-तरह दरिया-ए-दिल को अब मिरे आया है जोश

ऐ ख़ुमार-आलूदा दिल जानाँ के सन्मुख सम्हलियो
हुस्न के बाज़ार में रखता वो आँखें मय-फ़रोश

हर घड़ी हर आन दिल में 'इम्तियाज़' अब याद कर
वाक़िआ' को कर्बला के ला नज़र में कर ख़रोश