उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai dil-e-ushshaq tere jam-o-mina bin KHarab

है दिल-ए-उश्शाक़ तेरे जाम-ओ-मीना बिन ख़राब

ہے دل عشاق تیرے جام و مینا بن خراب

शायर: Lutfunnisa Imtiyaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है दिल-ए-उश्शाक़ तेरे जाम-ओ-मीना बिन ख़राब
रहम कर इस वक़्त पर साक़ी पियाला दे शिताब

क्या ही ना-ख़ुश हो रहा दिल कुछ कहा जाता नहीं
अब्र आवे झूम ऐसा ना मिले क़तरा शराब

वाइज़ा मस्तों का दिल हैगा ख़ुदा का घर सरीह
तोड़ मत उस के तईं संग-सितम से कर अज़ाब

हैं जहाँ तक शजर-ए-दुनिया सब हो जावें ताक के
या-इलाही है दुआ गर आशिक़ों की मुस्तजाब

मुंतज़िर हो कर खड़ा है 'इम्तियाज़' आ ज़ेर-ए-क़स्र
इक निगाह-ए-लुत्फ़ फ़रमा ऐ शह-ए-वाला जनाब