उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai dhum-e-rindan ek taraf saqi ka saman ek taraf

है धूम-ए-रिंदाँ इक तरफ़ साक़ी का सामाँ इक तरफ़

ہے دھوم رنداں اک طرف ساقی کا ساماں اک طرف

शायर: Lutfunnisa Imtiyaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है धूम-ए-रिंदाँ इक तरफ़ साक़ी का सामाँ इक तरफ़
मीना-ए-गिर्यां इक तरफ़ और जाम-ए-ख़ंदाँ इक तरफ़

देखे उसे गर यक नज़र वो ताब से बे-ताब हो
ख़ुर्शीद-ए-लर्ज़ां इक तरफ़ और मह गुरेज़ाँ इक तरफ़

ख़ंदाँ चमन में किस क़दर क़ामत पर अपने सर-कशाँ
है सर्व-ए-नाज़ाँ इक तरफ़ शमशाद-ए-शादाँ इक तरफ़

ऐसे में आ पहुँचे अगर वो माया-ए-नाज़-ओ-अदा
हों लाफ़-बाज़ाँ इक तरफ़ वो जान-ए-जानाँ इक तरफ़

अब 'इम्तियाज़' हैगी अजब ही आशिक़ों की सफ़ में धूम
गिर्यां-ओ-नालाँ इक तर्फ़ चाक-ए-गरेबाँ इक तरफ़