उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum pareshan hain teri is zulf bikhrane ke hat

हम परेशाँ हैं तिरी इस ज़ुल्फ़ बिखराने के हात

ہم پریشاں ہیں تری اس زلف بکھرانے کے ہات

शायर: Lutfunnisa Imtiyaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम परेशाँ हैं तिरी इस ज़ुल्फ़ बिखराने के हात
रोज़-ओ-शब तड़पे हैं ज़ालिम इस के बल खाने के हात

साक़ी-ए-बे-मेहर गंदुम रंग के जोरों से ही
पिस गया है जान-ओ-दिल तो हाए पैमाने के हात

बू अगर आवे तो यारो कीजियो तुम हम को याद
सर पटक कर मर गए अफ़्सोस मयख़ाने के हात

ये न समझे थे कि अब के ऐश सब जावेगा आह
हो गए बे-ख़ानुमाँ हम तो बहार आने के हात

क्यों परस्तिश से सनम की बाज़ आवे 'इम्तियाज़'
ज़ाहिदा हम बिक चुके हैं अब तो बुत-ख़ाने के हात