उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har ek hazar mein bas panch sat hain hum log

हर इक हज़ार में बस पाँच सात हैं हम लोग

ہر اک ہزار میں بس پانچ سات ہیں ہم لوگ

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर इक हज़ार में बस पाँच सात हैं हम लोग
निसाब-ए-इश्क़ पे वाजिब ज़कात हैं हम लोग

दबाओ में भी जमाअत कभी नहीं बदली
शुरूअ' दिन से मोहब्बत के साथ हैं हम लोग

जो सीखनी हो ज़बान-ए-सुकूत बिस्मिल्लाह
ख़मोशियों की मुकम्मल लुग़ात हैं हम लोग

कहानियों के वो किरदार जो लिखे न गए
ख़बर से हज़्फ़-शुदा वाक़िआ'त हैं हम लोग

ये इंतिज़ार हमें देख कर बनाया गया
ज़ुहूर-ए-हिज्र से पहले की बात हैं हम लोग

किसी को रास्ता दे दें किसी को पानी न दें
कहीं पे नील कहीं पर फ़ुरात हैं हम लोग

हमें जला के कोई शब गुज़ार सकता है
सड़क पे बिखरे हुए काग़ज़ात हैं हम लोग