उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum kisi waqt bikhar sakte hain

हम किसी वक़्त बिखर सकते हैं

ہم کسی وقت بکھر سکتے ہیں

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम किसी वक़्त बिखर सकते हैं
इतने ज़िंदा हैं कि मर सकते हैं

आँच लफ़्ज़ों की बचाए रखना
जज़्बे इस रुत में ठिठर सकते हैं

वा'दा-ए-वस्ल बड़ी बात नहीं
आप चाहें तो मुकर सकते हैं

ये जो तज्दीद के नश्शे में हैं धुत
शह्र को दश्त भी कर सकते हैं

इतना नाज़ाँ न हो नक़्श-ए-पा पर
लोग बच कर भी गुज़र सकते हैं

अब भी आ जाए अगर वो आवाज़
वक़्त के पाँव ठहर सकते हैं