उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum gharibon ki bebasi dekho

हम ग़रीबों की बेबसी देखो

ہم غریبوں کی بے بسی دیکھو

शायर: Lokesh Tripathi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ग़रीबों की बेबसी देखो
धूप में भूक पक रही देखो

शर्त इतनी सी उस ने रक्खी है
जो दिखाऊँ मैं बस वही देखो

उन की आँखों से मिल के आईं हैं
मेरी आँखों की ताज़गी देखो

जिस लिए मर रहे हैं सब के सब
मर रही है वो ज़िंदगी देखो

देखता रहता था मैं जिस का घर
घर मिरे आ गई वही देखो