उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum aaj bahut un ko KHafa dekh rahe hain

हम आज बहुत उन को ख़फ़ा देख रहे हैं

ہم آج بہت ان کو خفا دیکھ رہے ہیں

शायर: Gauhar Shaikh Purwi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम आज बहुत उन को ख़फ़ा देख रहे हैं
ऐ शोख़ी-ए-तक़दीर ये क्या देख रहे हैं

ये आप की पुर्सिश का मिला है हमें इनआ'म
कुछ दर्द-ए-मोहब्बत को सिवा देख रहे हैं

पहचान में आते नहीं पहचाने हुए लोग
बदली हुई दुनिया की हवा देख रहे हैं

हम अम्न के घर में हैं मगर ये भी तो सच है
मंडलाती हुई सर पे क़ज़ा देख रहे हैं

कुछ और सिवा हो गईं बे-ताबियाँ दिल की
क्या ख़ूब ये तासीर-ए-दुआ देख रहे हैं

हर सम्त अंधेरा है अंधेरा है अंधेरा
फैली हुई ज़ुल्फ़ों की घटा देख रहे हैं

कुछ कम नहीं ये शैख़-ओ-बरहमन की करामात
हम गोश्त से नाख़ुन को जुदा देख रहे हैं

लग जाएगा सूरज को गहन आज यक़ीनन
रुख़ को तिरे ज़ुल्फ़ों से घिरा देख रहे हैं

ये बात रहे पेश-ए-नज़र आप के 'गौहर'
अब रंग-ए-ग़ज़ल लोग नया देख रहे हैं